नई दिल्ली/ दुनियाभर के देशों से ईरान के बहिष्कार की आवाज उठा रहे अमेरिका की तरफ से इस बारे में सीधे दबाव आने की आशंका भारत देख रहा है।
एक मार्च से तेहरान के साथ कारोबारी रिश्ते खत्म करने के यूरोप समेत कई पश्चिमी मुल्कों के फैसले के बीच तेहरान के साथ संबंध कायम रखने पर अड़े भारत को अंदेशा है कि वाशिंगटन इस मामले में उस पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है।
अमेरिका के दबाव का जवाब तैयार किया
विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने अमेरिका की इस संभावित कोशिश के मद्देनजर साउथ ब्लॉक में लंबी बैठक भी की है। संयुक्त सचिव (अमेरिका) जावेद अशरफ ने कूटनीतिज्ञों से चर्चा कर ईरान पर पाबंदी में पश्चिमी देशों का साथ देने संबंधी अमेरिका के दबाव का जवाब तैयार किया गया है। शीर्ष सूत्रों ने कहा है कि ईरान के साथ संबंधों को कैसे चलाना है, इस पर किसी तीसरे मुल्क की इच्छा नहीं चलेगी।
निरुपमा राव को भी इससे अवगत करा दिया
विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को यही जवाब देने का फैसला किया है कि नई दिल्ली और तेहरान के बीच पारंपरिक रिश्तों को द्विपक्षीय हितों के मद्देनजर आगे बढ़ाया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि भारत ने अमेरिका को अपने संदेश को कूटनीतिक लहजे में तैयार कर वाशिंगटन में अपनी राजदूत निरुपमा राव को भी इससे अवगत करा दिया है।
खबर पर अपनी राय दें







