नई दिल्ली/ चुनाव सुधार के नाम पर चुनाव आयोग के पर कतरने को लेकर सरकार की अंदरखाने हो रही कोशिशों की भनक मिलने से सियासी तूफान खड़ा हो गया है।
वहीं, केंद्र सरकार के मंत्रियों ने आचार संहिता हनन के मामलों को चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र से निकालकर अदालतों के दायरे में लाने संबंधी किसी भी प्रस्ताव से इनकार किया है। लेकिन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने आचार संहिता पर सर्वदलीय बैठक की संभावना जताकर इस मुद्दे को सरकार के एजेंडे में होने का संकेत दे दिया। इससे सियासी विवाद खड़ा हो गया है।
सीधे केंद्र सरकार पर निशाना साधा
भाजपा ने सरकार की दूरगामी मंशा को भांपकर सीधे केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने मंगलवार को साफ कहा कि आचार संहिता का हनन कर रहे अपने मंत्रियों पर लगाम कसने की जगह ही सरकार चुनाव आयोग के पर कतरने की योजना बना रही है। जेटली ने खुर्शीद और बेनी प्रसाद वर्मा के आचार संहिता हनन के हालिया विवाद से अयोग के अधिकार में कटौती की भीतरखाने हो रही कोशिश को जोड़ दिया।
ऐसा कोई एजेंडा जीओएम के पास नहीं
बवाल की जड़ मीडिया में आई वह खबर है जिसमें कहा जा रहा है कि सरकार आचार संहिता को वैधानिक करने की कोशिश में है। यह भी कहा जा रहा है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह (जीओएम) के एजेंडे पर आयोग के पर कतरने जैसे मुद्दे हैं। हालांकि मुखर्जी ने कहा कि ऐसा कोई एजेंडा नहीं है।
कार्मिक मंत्रालय ने भी कहा है कि ऐसा कोई एजेंडा जीओएम के पास नहीं है। लेकिन जीओएम के लिए तैयार डीओपीटी के नोट में इस मुद्दे का जिक्र किया गया है। इस पर मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, मंत्रियों के समूह के समक्ष भी ऐसे किसी प्रस्ताव की उन्हें जानकारी नहीं है। जरूरी नहीं कि मंत्रियों के समूह के समक्ष जो प्रस्ताव विचाराधीन हो, उससे सरकार सहमत ही हो।
विपक्ष को सियासी बारूद देने के लिए काफी
सलमान खुर्शीद ने सरकार की ऐसी किसी पहल से तो इनकार किया लेकिन इस पर चर्चा की बात चुनाव सुधारों के प्ररिप्रेक्ष्य में कह डाली। सर्वदलीय बैठक बुलाकर भी इस पर चर्चा करने के लिए खुर्शीद ने कह दिया। कानून मंत्री की तरफ से यह संकेत, चुनाव आयोग के अधिकारों में कटौती की सरकार की साजिश का आरोप मढ़ रहे विपक्ष को सियासी बारूद देने के लिए काफी था। कानून मंत्री ने यह जरूर कहा कि सरकार का इरादा अयोग पर शिकंजा कसना नहीं है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने आलोचना की
मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि ऐसा लगता है कि आयोग की शक्तियों को कम करने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट में आचार संहिता का मामला जाने के बाद फैसला आने में लंबा समय लगेगा और दोषी व्यक्ति सत्ता का सुख भोगता रहेगा।
आदर्श चुनाव आचार संहिता को चुनाव आयोग के दायरे से वापस लेने का सवाल ही नहीं है। मुझे इसकी जानकारी नहीं है कि यह मामला उठा कहां से है। इस तरह का कोई मामला ही नहीं है और यह अब तक केन्द्रीय मंत्रिमंडल के मंत्रियों के समूह के समक्ष भी नहीं आया है।
प्रणब मुखर्जी, वित्त मंत्री
क्या कहना है भाजपा का
अरुण जेटली ने कहा कि भ्रष्टाचार पर केंद्र सरकार के गठित मंत्रियों के समूह में एक सर्कुलर बांटा गया है, जिसमें प्रस्ताव है कि आचार संहिता पर नियंत्रण रखने का अधिकार चुनाव आयोग की बजाए न्यायपालिका को दे दिया जाए। आयोग के अधिकार को कम करने की कोशिश की जा रही है लेकिन भाजपा ऐसा नहीं होने देगी। कांग्रेस चाहती हैं कि आचार संहिता को पंचर कर दिया जाए।
क्या है मामला
चुनाव आयोग की शक्तियों में कटौती करने की खबरों को लेकर नया विवाद पैदा हो गया है। इस तरह की खबरें हैं कि सरकार चुनाव आचार संहिता का मामला चुनाव आयोग से छीनकर अदालतों को सौंपने की तैयारी में है।








