निवेश के जरिये पैसे से पैसा कमाना हर कोई चाहता है, पर इसमें कामयाबी उसी को मिलती है, जो सोच-समझ कर एक बेहतर रणनीति के साथ निवेश करे। जाहिर है, बात जब निवेश की रणनीति की आती है, तो सबसे पहले मन में यही सवाल उठता है कि निवेश कहां और कितना करें।
ऐसा करना बहुत कठिन भी नहीं है
इन चीजों का निर्धारण हर किसी को अपनी आमदनी, जरूरतों, आर्थिक जिम्मेदारियों और जोखिम उठाने की क्षमता जैसी बातों पर विचार करके ही करना चाहिए, क्योंकि सबके लिए यह अलग-अलग होती हैं। इसके बावजूद निवेश से जुड़ी दो मूलभूत बातें ऐसी हैं, जो सभी निवेशकों के लिए फायदेमंद होती हैं। अत: निवेश में इनका पालन सभी को करना चाहिए। निवेश के यह दो सुनहरे नियम हैं- लंबी अवधि के लिए निवेश करें और नियमित निवेश करें। ऐसा करना बहुत कठिन भी नहीं है। जरूरत केवल इस बात की है कि आप अनुशासित ढंग से निवेश की शुरुआत करें और उसके बाद उसमें बने रहने का निश्चय करें। कुछ बुनियादी सिद्धांतों का पालन कर इसमें आने वाली कठिनाइयों से काफी हद तक निपटा जा सकता है।
मुसीबत के लिए अलग पूंजी रखें
जिंदगी में कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाती है और उसे टाला नहीं जा सकता जैसे- दुर्घटना, इलाज या कोई बड़ी खरीद आदि। इनके लिए तत्काल पैसों की जरूरत पड़ती है। इसके लिए एक कारगर रणनीति यह है कि आप अपनी औसत मासिक आय के हिसाब से चार से छह महीने की राशि के बराबर पूंजी को इन कामों के लिए अलग रखें। जरूरत के समय उपलब्ध होने के साथ-साथ यह पूंजी बढ़ती भी रहे, इसके लिए आप इस राशि को कैश फंड जैसे तुरंत नकदीकरण वाले विकल्पों में भी लगा सकते हैं।
जोखिम उठाने की क्षमता को समझें
बाजार से सीधे तौर पर जुड़े विकल्पों में भारी रिटर्न मिलने की संभावना ज्यादा होती है, पर इसमें जोखिम भी काफी बड़ा होता है। दूसरी ओर पूंजी की सुरक्षा पर केंद्रित विकल्पों में आपके पैसे तो सुरक्षित रहते हैं, पर रिटर्न कम होता है। कई बार तो यह महंगाई की चाल के आगे बौना साबित होता है। ऐसे में अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को समझते हुए दोनों तरह के विकल्पों में एक संतुलन बना कर निवेश करने में समझदारी है। पूंजी के एक भाग को सुरक्षित निवेश विकल्पों में लगाएं तथा उससे बची रकम को अपनी क्षमता के मुताबिक सीमित जोखिम वाले विकल्पों में लगाया जा सकता है।
जानकार की सलाह लेकर करें फैसला
देखादेखी में या महज दूसरों की बातों में आकर निवेश करना आपके लिए भारी पड़ सकता है। सबसे बेहतर यह होगा कि इसके लिए किसी पेशेवर सलाहकार की मदद ली जाए। कंसल्टेंट को अपनी निवेश क्षमता, लक्ष्य, और जोखिम उठाने की क्षमता आदि बताकर अपने मुताबिक निवेश विकल्प बताने को कहें और फिर निवेश के उस रोडमैप पर नियमित रूप से चलते रहें।
समय दें और समीक्षा करें
कंसल्टेंट की सेवा लेने का यह मतलब कतई नहीं कि आप आंख मूंद कर बैठ जाएं। आपको अपने निवेश पर बराबर नजर रखनी चाहिए और उसकी समीक्षा करते रहना चाहिए। यह तभी संभव होगा जब आप इसके लिए नियमित रूप से समय दें। एक सर्वेक्षण के मुताबिक बाजार में निवेश करने वाले अगर महज 10 दिन बाजार के प्रदर्शन पर नजर नहीं रखते तो उनके सालाना रिटर्न गिरकर 8.65 फीसदी तक आ सकता है। दूसरी ओर पूरी अवधि तक निवेश पर नजर रखने पर रिटर्न का औसत 17.17 फीसदी तक का होता है। इससे सहज ही समझा जा सकता है कि निवेश पर नजर बनाए रखना कितना जरूरी है। दूसरी ओर निवेश पर नजर रखने और समीक्षा करते रहने का मतलब यह भी नहीं है कि इसे रोजाना का काम बना लिया जाए। निवेश की समीक्षा एक वाजिब अवधि में करना ही बेहतर रहता है और समीक्षा के दौरान जरूरत महसूस होने पर अच्छी तरह सोच-समझ कर निवेश में बदलावों पर भी विचार किया जा सकता है।
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